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ट्रेन की छतों पर क्यों लगाए जाते है छोटे-छोटे ढक्कन, इनके बिना रेल सफर की नही कर सकते कल्पना

By Rahul Junaid

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भारतीय रेलवे की ट्रेनों में यात्रियों के सुविधा और सुरक्षा के लिए कई उपाय किए जाते हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण उपाय है ट्रेन की छत पर लगाई गई वेंटिलेशन व्यवस्था जो कि यात्रियों को गर्मी और उमस से राहत दिलाने का काम करती है। इस लेख में हम इस वेंटिलेशन सिस्टम के महत्व को समझेंगे।

वेंटिलेशन व्यवस्था न केवल गर्मी को कम करने में मदद करती है बल्कि यह ओवरहीटिंग से होने वाले संभावित खतरों से भी यात्रियों की रक्षा करती है। इसलिए, भारतीय रेलवे द्वारा इस तरह के उपकरणों का इस्तेमाल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए किया जाता है। जिससे यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

ट्रेनों में वेंटिलेशन की जरूरत

जब ट्रेनों में यात्रियों की संख्या अधिक होती है, तो कोच में गर्मी का स्तर बढ़ जाता है जो यात्रा को असुविधाजनक बना देता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए ट्रेन के कोच में विशेष वेंटिलेशन सिस्टम लगाए गए हैं जो गर्म हवा को बाहर निकालने में मदद करते हैं। यह न केवल यात्रा के दौरान आरामदायक माहौल प्रदान करता है बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी उचित होता है।

वेंटिलेशन सिस्टम का कार्यप्रणाली

ट्रेन की छत पर लगे वेंटिलेटर का मुख्य काम होता है गर्म हवाओं को बाहर निकालना। ट्रेन के अंदर की हवा गर्म होने पर हल्की हो जाती है और ऊपर की ओर चढ़ जाती है। जिसे ये वेंटिलेटर सक्रिय रूप से बाहर खींच लेते हैं। यह व्यवस्था कोच के अंदर के तापमान को नियंत्रित रखती है और यात्रियों को गर्मी से राहत देती है।

ट्रेन की छत पर जालियाँ और छेद

ट्रेन के कुछ कोचों में जालियाँ और कुछ में छोटे छोटे छेद होते हैं। ये जालियाँ या छेद ट्रेन की ऊपरी प्लेटों से जुड़े होते हैं और इनके जरिए गर्म हवाएँ बाहर निकलती हैं। यह वेंटिलेशन प्रक्रिया कोच के अंदर की गर्मी को कम करती है और यात्रियों के लिए एक सहज और सुखद यात्रा का माहौल बनाती है।

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