ना रतन टाटा न अजीम प्रेमजी यह है दुनिया का सबसे बड़ा दानी दान मे दे दिए 829734 करोड़ रुपये

1904 में जमशेतजी टाटा ने अंतिम सांस ली। उसके बाद टाटा ग्रुप के मानद अध्यक्ष रतन टाटा को बनाया गया अब रतन टाटा , टाटा ग्रुप की दान देने वाली संस्था के अध्यक्ष है। टाटा के अलावा, विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी भी दुनिया के शीर्ष 50 परोपकारियों की सूची में शामिल हैं। 

 
Neither Ratan Tata nor Azim Premji is the world's biggest donor. He donated Rs 829734 crore.

कौन था वह इंसान 

पूरे विश्व मे सबसे ज्यादा दान देने वाले टाटा ग्रुप के संस्थापक जमशेतजी टाटा थे जिनको पिछली सदी में विश्व का सबसे बड़ा धनी बताया गया है। उन् होंने 2021 की एडेलगिव फाउंडेशन और हुरुन रिपोर्ट के अनुसार 829734 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा दान दिया है। उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा दान देने वाला व्यक्ति बताया गया है। साथ ही, बिल गेट्स ने इस सूची में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। जमशेतजी टाटा ने अर्धदान शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किया। 1892 में, टाटा ग्रुप ने दान देने की पहल की।

जमशेतजी टाटा के अलावा अजीम प्रेमजी भी है सामील 

1904 में जमशेतजी टाटा ने अंतिम सांस ली। रतन टाटा, जो पहले टाटा ग्रुप के मानद अध्यक्ष थे, अब टाटा ग्रुप की दान देने वाली संस्था का अध्यक्ष हैं। रूपर्ट हुगेवर्फ, हुरुन रिपोर्ट के चेयरमैन और चीफ रिसर्चर, ने कहा, "कई परोपकारियों ने पहली पीढ़ी के बजाय दूसरी पीढ़ी को दान दिया, जैसे कि फोर्ड फाउंडेशन की कहानी।टाटा के अलावा, विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी भी दुनिया के शीर्ष 50 सबसे ज्यादा दान देने वालों परोपकारियों की सूची में शामिल हैं उन्होंने 22 बिलियन डॉलर का दान दिया है । 

रतन टाटा

रतन टाटा, टाटा ग्रुप के मानद चेयरमैन, 1904 में जमशेतजी टाटा की मौत के बाद से ग्रुप की गैर-लाभकारी गतिविधियों को देख रहे हैं। गुजरात के पारसी परिवार में जमशेतजी टाटा का जन्म हुआ था। उस समय उनकी फैमिली का कोई पैसा नहीं था। जमशेतजी टाटा ने कारोबार शुरू करने वाले परिवार के पहले सदस्य बने। टाटा ने हीराबाओ दब्बू से शादी की. उनके दो बेटे, दोराबजी टाटा और रतनजी टाटा, बाद में उद्योगपति बन गए।

'द ताज महल पैलेस'

1903 में, Jamsetji Tata ने मुंबई में देश का पहला 5 स्टार लग्जरी होटल बनाया। आज इस होटल को 'द ताज महल पैलेस' कहा जाता है। 1868 में जमशेदजी टाटा ने सिर्फ 29 वर्ष की उम्र में 21,000 रुपये में एक ट्रेडिंग कंपनी की शुरुआत की। उस समय उन्हें पता था कि भारतीय कंपनियों के पास टेक्सटाइल में काफी जगह है। 1869 में वे टेक्सटाइल बिजनेस में शामिल हुए।

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