यूपी का मोटू खान पान बेचने गया पाकिस्तान बन गया ISI का मेम्बर , जाने पूरी कहानी

UP ATS ने मुजफ्फरनगर से ISI एजेंट तहसीम उर्फ मोटा को गिरफ्तार किया, जो कई वर्षों से सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर नकली नोट की तस्करी में फरार था। 2002 में, तहसीम पान-कत्था, मसाला सेलर के रूप में पाकिस्तान में नियुक्त हो गया। ISI के साथ मिलकर वह भारत में नकली करेंसी और दवा बेचने लगा।

 
Motu from UP went to Pakistan to sell food and became a member of ISI, know the whole story

तहसीम उर्फ मोटा को पकड़ा ATS ने 

यूपी एटीएस ने बड़ी सफलता हासिल की है। ATS ने मुजफ्फरनगर के बुढाना से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) से मिलकर देशविरोधी और आपराधिक गतिविधियां करने वाले वांटेड तहसीम उर्फ मोटा को गिरफ्तार किया है। तहसीम मूलतः शामली का निवासी है। पूछताछ में गिरफ्तार तहसीम ने बताया कि वह और उसका भाई कलीम अक्सर पाकिस्तान आते-जाते रहते थे। उनकी ISI के कुछ हैंडलर को पाकिस्तान में ही मार डाला गया था। 

गुरुवार (11 जनवरी) को एसएफटीएफ अधिकारी ने बताया कि अगस्त 2023 में शामली कोतवाली क्षेत्र से इमरान नामक व्यक्ति को 6 लाख के नकली नोट के साथ गिरफ्तार किया गया था। तहसीम उर्फ मोटा भी इस मामले में आरोपी था। तहसीम के भाई कलीम भी गिरफ्तार किया गया था, जिसका शक था कि ISI से जुड़ा था। तब तक तहसीम फरार चल रहा था। टीमें उसकी तलाश में लगी हुई थीं। उसे अब पकड़ लिया गया है। 

तहसीम और कलीम लगातार पाकिस्तान आते-जाते थे

अधिकारी ने कहा कि तहसीम और कलीम लगातार पाकिस्तान आते-जाते थे। पाकिस्तान में उनके ISI के कुछ हैंडलरों की हत्या कर दी गई। उस व्यक्ति ने दोनों भाइयों को पैसे का लालच देकर कहा कि अगर वे भारत में जिहाद फैलाते हैं, तो हम उन्हें असलहा और बारूद भी देंगे। साथ ही भारत में सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ने के लिए लोगों को तैयार करो। 

गिरफ्तार तहसीम और कलीम फर्जी सिम से WhatsApp प्रयोग करते थे और भारत में बैठकर ISI एजेंट दिलशाद उर्फ मिर्जा से संपर्क करते थे। 2002 में, तहसीम पान-कत्था, मसाला के रूप में पाकिस्तान में उपलब्ध हो गया। ISI के साथ मिलकर वह भारत में नकली करेंसी और दवा बेचने लगा।

पाकिस्तान के कुछ लोग है उसके रिश्तेदार 

तहसीम 2002 में पाकिस्तान के कोटाद्दू में अपने रिश्तेदार (पिता की बुआ) के यहां गया था। तहसीम वहां पान और कत्था बेचने गया था। वह कोटाद्दू में अपने रिश्तेदार के पास लगभग दस से पंद्रह दिन ही रहा, बाकी बीस से पंद्रह दिन वह लाहौर में हमीदा के यहां चला गया। हमीदा मूल रूप से कैराना (शामली) में रहती है। 

वास्तव में, कैराना का निवासी इकबाल काना कुछ समय पहले आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के बाद पाकिस्तान भाग गया था। हमीदा भी इकबाल काना को इन कामों में सहयोग देती थी। वह भी पकड़े जाने के डर से इकबाल की सहायता से पाकिस्तान भाग गई। तहसीम ने हमीदा के माध्यम से पकिस्तान में इकबाल काना से मुलाकात की। 

नकली नोट बेचने का काम था इनका 

तहसीम ने लाहौर में हमीदा के साथ रहते हुए एक ड्राई फूड स्टोर मालिक इकबाल काना से मुलाकात की। उसे केसर ने नकली नोट बेचने के काले धंधे में डाल दिया। तहसीम को दिलशाद मिर्जासे ने केसर से पहचाना था। Dilshadad ने उसे देशविरोधी कार्यों में शामिल करने के लिए प्रेरित किया। 

पाकिस्तान से वापस आने के बाद, केसर और इकबाल काना ने तहसीम को फोन कर फर्जी करेंसी भेजना शुरू कर दिया। हर खेप में दो लाख से सात लाख रुपये की राशि भेजी जाती थी। तहसीम कभी दिल्ली से तो कभी अमृतसर से फोन करता था। इस बीच, बहुत से लोग रंगे हाथ पकड़े गए और परत दर परत खुलासा हुआ।  
 

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