राजस्थान के इस सरकारी स्कूल के आगे फैल है प्राइवेट स्कूल, यहाँ बच्चों का एडमिशन करवाने के लिए तरसते है पेरेंट्स

 
राजस्थान के इस सरकारी स्कूल के आगे फैल है प्राइवेट स्कूल, यहाँ बच्चों का एडमिशन करवाने के लिए तरसते है पेरेंट्स

डूंगरपुर. डूंगरपुर में एक सरकारी स्कूल है जहां अभिभावक अपने बच्चे का एडमिशन करवाने के लिए लाइन में खड़े रहते हैं, हालांकि आम तौर पर सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों से कमजोर माना जाता है। अभिभावकों को ये स्कूल पहली पसंद है क्योंकि यहां के शिक्षकों का पढ़ाने का तरीका इतना अद्वितीय है। क्योंकि यहां खेल-कूद और अन्य खेलों से पढ़ाई की जाती है।

15 किलोमीटर दूर से बच्चे पढ़ने आते हैं

डूंगरपुर के सुरपुर गांव में स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल भिलवटा में इस बार भी दाखिला लेने वालों की भीड़ लग गई है। आजकल जगह-जगह स्कूल हैं। लेकिन बच्चे पांचवीं तक स्कूल में 15 से 20 किलोमीटर दूर से आते हैं। 2013 में, दो शिक्षक दीपक पांड्या और दीपिका पांड्या ने स्कूल में पदार्पण किया। उस समय स्कूल में सिर्फ पंद्रह बच्चे आते थे और स्कूल की हालत खराब थी। पहले दोनों ने मिलकर स्कूल की बदहाली को सुधारा और 15 बच्चों को साइकॉलोजी में पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए स्वयं अध्ययन किया। कक्षा पांच तक के बच्चों ने इसके बाद खेल-खेल में पढ़ना शुरू कर दिया। बच्चों की संख्या बढ़ती चली गई क्योंकि पढ़ाई का तरीका इतना रोचक था।

विभिन्न सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी भिलवटा स्कूल से बेहतर हैं। अब हालात इतने बदल गए हैं कि अन्य स्कूलों के बच्चे भी टीसी लेकर भिलवटा स्कूल में आते हैं। सहायक सामग्री के साथ यहां गणित और विज्ञान के सभी विषय पढ़ाए जाते हैं। जो बच्चे आसानी से समझ सकते हैं।

घर – घर जाकर बच्चों को स्कूल भेजने का आह्वान किया

जब इस स्कूल में शामिल हो गया। उस समय स्कूल का भवन तक नहीं था और बहुत कम बच्चे थे। बाद में उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपने घर से दरी पट्टी लाकर बच्चों को आंगनबाड़ी में पढ़ाया। गावों के लोगों के साथ एक बैठक में गए और घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल भेजने का आग्रह किया ताकि बच्चों को शिक्षा से जोड़ सकें। अब अभिभावकों को अपने बच्चों को इस स्कूल में एडमिशन कराने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।

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