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कनाडा में भारतीय लड़के को मुफ्त खाना लेने का आइडिया बताना पड़ा महंगा, बंदे को अपनी हरकत के कारण नौकरी से धोना पड़ा हाथ

By Rahul Junaid

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फूड बैंक जो कि गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए स्थापित की गई हैं अक्सर समाज के उन वर्गों के लिए जीवनदायिनी साबित होती हैं जिन्हें खाने-पीने की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी करने में कठिनाई होती है। कनाडा में भी इसी तरह के फूड बैंकों का चलन है।

जहां लोग बिना किसी लागत के अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। हालांकि मेहुल प्रजापति नामक एक डेटा वैज्ञानिक ने इस सुविधा का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया जिससे बहस की एक नई लहर उठ खड़ी हुई।

मुफ्त भोजन का वीडियो

मेहुल प्रजापति ने वीडियो में दिखाया कि कैसे वह खुद के लिए फूड बैंक से फल सब्जियां ब्रेड और अन्य सामग्री नियमित रूप से प्राप्त करते हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसने कई लोगों को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वे इस पर अपनी-अपनी राय व्यक्त करें।

आलोचना और समर्थन का दौर

कुछ लोगों ने मेहुल की आलोचना की और उन्हें यह कहते हुए निंदा की कि फूड बैंक उन लोगों के लिए हैं जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है और उनका इस तरह से इस्तेमाल करना अनैतिक है। वहीं कुछ ने मेहुल का समर्थन किया और कहा कि व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का सही आकलन किए बिना उनकी निंदा करना उचित नहीं है।

नौकरी से से हाथ धोना पड़ा

विवाद इतना बढ़ गया कि मेहुल प्रजापति को उनकी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इस घटना ने न केवल उनके निजी जीवन में बल्कि पेशेवर जीवन में भी गहरी चोट पहुंचाई। इससे यह भी साबित होता है कि सोशल मीडिया पर की गई हरकतें अक्सर अप्रत्याशित परिणाम ला सकती हैं।

समाज में इसके गहरे प्रभाव

यह घटना समाज में गरीबी और संसाधनों की उपलब्धता के बारे में चर्चा को गहरा देती है। यह न केवल उन लोगों के लिए एक सबक है जो सिस्टम का दुरुपयोग करते हैं बल्कि उन लोगों के लिए भी जो सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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