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2 पिन से लाइट आ जाती है तो प्लग में क्यों लगाई जाती है तीसरी प्लग, जाने किस काम आता है ये एक्स्ट्रा पिन

By Rahul Junaid

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आज के युग में बिजली के उपकरणों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है जिसके चलते विद्युत प्लग्स और चार्जर्स की महत्वपूर्णता भी बढ़ी है। घरेलू और वाणिज्यिक दोनों तरह के उपकरणों में प्लग का उपयोग आवश्यक होता है। बिजली के प्लग न केवल उपकरणों को ऊर्जा प्रदान करते हैं।

बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने में भी मदद करते हैं। बिजली के प्लग का इतिहास और उनकी तकनीकी विशेषताएं हमें यह समझने में मदद करती हैं कि कैसे ये छोटे घटक हमारे दैनिक जीवन में सुरक्षा और सुविधा को बढ़ाते हैं।

दो-पिन प्लग का प्रयोग और इतिहास

भारत में अधिकतर छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे कि मोबाइल फोन कैमरे आदि के लिए दो-पिन प्लग का प्रयोग किया जाता है। इन प्लग्स को आमतौर पर यूरो प्लग के रूप में जाना जाता है जिनकी पिन गोल होती हैं और इनका व्यास 4.0 मिमी होता है।

इस प्रकार के प्लग का विकास आजादी के बाद हुआ था जब भारत ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली की पहुंच सुधारने के लिए दो-पिन प्रणाली को अपनाया। यह सिस्टम अपेक्षाकृत कम विकसित बिजली अवसंरचना के लिए अनुकूल था।

तीन-पिन प्लग की उपयोगिता और सुरक्षा

तीन-पिन प्लग में एक अतिरिक्त तीसरी पिन होती है जिसे अर्थ पिन कहा जाता है। यह पिन उपकरणों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है। अर्थ पिन का मुख्य कार्य यह है कि यह उपकरण में अतिरिक्त बिजली को जमीन में भेज देता है जिससे शॉर्ट सर्किट या अन्य विद्युत संबंधी खराबी होने पर उपकरण और उपयोगकर्ता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की भूमिका

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने बिजली के उपकरणों और प्लग की सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू किया है। BIS के अनुसार जिन उपकरणों में 5 एम्पीयर से अधिक की खपत होती है उनमें तीन-पिन प्लग का उपयोग अनिवार्य है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सभी भारी उपकरण सुरक्षित रूप से संचालित हों और बिजली की आपूर्ति में कोई रुकावट या खतरा न हो।

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